बक्सर | DB Nation News
महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय, बक्सर में शुक्रवार को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ। "विकसित भारत 2047 के लिए भारत की निर्वाचन प्रणाली का पुनर्निर्माण" विषय पर केंद्रित इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विषय विशेषज्ञों ने चुनावी सुधारों, लोकतांत्रिक व्यवस्था और डिजिटल सशक्तिकरण पर गंभीर मंथन किया।
दीप प्रज्ज्वलन से हुई शुरुआत, अतिथियों का सम्मान
कार्यक्रम की शुरुआत महर्षि विश्वामित्र की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत और कुलगीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर सभी विशिष्ट अतिथियों को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
'तकनीक से मजबूत होगा लोकतंत्र'
महाविद्यालय के प्राचार्य एवं संगोष्ठी अध्यक्ष प्रो. कृष्णकांत सिंह ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन सुधारों पर गंभीर शैक्षणिक चर्चा भविष्य की नीतियों को नई दिशा दे सकती है।
चुनावी व्यवस्था में बदलाव पर जोर
संगोष्ठी के संयोजक डॉ. अरविंद वर्मा ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र समय के साथ नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में निर्वाचन प्रणाली, डिजिटल तकनीक, संवैधानिक व्यवस्था और जनभागीदारी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना समय की मांग है।
आयोजन सचिव डॉ. आलोक कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य देशभर के शिक्षाविदों और शोधार्थियों को एक साझा मंच प्रदान करना है, जहां लोकतंत्र और चुनावी सुधारों से जुड़े समकालीन विषयों पर सार्थक विमर्श हो सके।
देशभर के विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
उद्घाटन सत्र में विभिन्न विश्वविद्यालयों के पूर्व कुलपतियों और वरिष्ठ शिक्षाविदों ने भारतीय लोकतंत्र की मजबूती, चुनावी सुधारों की आवश्यकता तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को और प्रभावी बनाने के उपायों पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता के लिए समय-समय पर सुधार आवश्यक हैं।
एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर विस्तृत चर्चा
संगोष्ठी के अकादमिक सत्रों में "एक राष्ट्र, एक चुनाव" की अवधारणा, उसके संवैधानिक, प्रशासनिक और व्यावहारिक पहलुओं पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की। विभिन्न वक्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय चुनावी व्यवस्थाओं के उदाहरण देते हुए भारतीय संदर्भ में इसकी संभावनाओं और चुनौतियों का विश्लेषण प्रस्तुत किया।
शोध-पत्रों में उभरे नए दृष्टिकोण
देशभर से आए शोधार्थियों ने चुनावी पारदर्शिता, डिजिटल लोकतंत्र, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, निर्वाचन आयोग की भूमिका और लोकतांत्रिक सुदृढ़ीकरण जैसे विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने शोधार्थियों के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
कल भी जारी रहेगा विचार मंथन
राष्ट्रीय संगोष्ठी का दूसरा दिन भी विभिन्न तकनीकी एवं अकादमिक सत्रों के साथ जारी रहेगा। आयोजकों का मानना है कि इस संगोष्ठी से निकले निष्कर्ष विकसित भारत-2047 की लोकतांत्रिक परिकल्पना को मजबूत करने में उपयोगी साबित होंगे।








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